दलित - मुस्लिम - ओ बी सी या सवर्ण जानिये कौनसी जातिया है सबसे जयादा अपराधी
| 01 Jul 2018

अंगेजो ने वर्ष 1871 में एक नए कानून 'क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट' को लागू किया. इस कानून के दायरे में लगभग 500 जनजातियों को लाया गया. हलांकि १९४७ के बाद आजाद भारत में इन जातियो को इस एक्ट से बाहर निकाल दिया गया लेकिन आज भी समाज में आर्थिक और शेक्षिक रूप से पिछड़े होने के कारण यह जातियाँ आज भी सामाजिक पूर्वाग्रह का सामना करती है .

लेकिन कमाल की बात यह है कि ये जातिया या इस जाति क लोग गरीबी , बेरोजगारी से परेशान आज भी सभी सामान्य जातिओ के लोगो की तरह अपराध करते है

लेकिन अब अपराधो के करने वालो की जातिया बदल चुकी है लोग शौक में ऐश करने के लिए अपना दबदबा बनाए रखने के लिए राजनितिक कारणों से अपराध किये जाते है .

कमाल की बात यह है अब अंग्रेजो की बनाई या दर्ज की गई जातिया अपराधी नहीं है बल्कि वो जातिया है जो अपने आपको संस्कारी , सवर्ण और महान बताते है .. जैसे स्वीस बैंक में पैसा जमा करने वाले लोग इन अपराधिक जातियों में से नही है, देश में आतंकवाद फैलाने वाले लगभग सभी लोग स्वर्ण ब्राह्मण बनिए है , देश में आर्थिक अपराध घोटाले जिनसे देश खोखला हुआ देश के विकास का पैसा खाने वाले सब स्वर्ण .
हाल में देश में एक बलात्कार को लेकर मुसलमानों को दोषी बनाया जा रहा है लेकिन वही लोग कश्मीर में असीफा का बलात्कार करने वाले ब्राह्मणों को भूल गए है

आज देश में अपराध जिस तरह बढ़ रहे है अगर वैसे में अपराधियो की जाति की जन-गणना करना जरूरी हो जाता है और यह बात बिलकुल साबित होनी ही चाहिए की इस देश में अपराधियो का बोलबाला , देश से गद्दारी के , आतंक के आर्थिक अपराध के घोटालो के कत्लो के मुख्य अपराधी केवल और केवल सवर्ण ब्राह्मण बनिए और अन्य ही है