राज्यों के प्रतिनिधियों ने राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस (अगस्त 2018) की तैयारी पर चर्चा के लिए बैठक
| 26 Jun 2018

नई दिल्ली, 26 जून, 2018 : बच्चों को कृमि से मुक्ति दिलाने के लिए आयोजित किये जाने वाले राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस को सफल बनाने की योजना बनाने के लिए एक बैठक आयोजित की गई। अगस्त 2018 में आगामी राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के लिए आयोजित इस कार्यक्रम योजना और समीक्षा बैठक में 25 राज्यों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

यह बैठक भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने की और यह बैठक तकनीकी सहायता पार्टनर एविडेंस एक्शन द्वारा आयोजित की गई थी। इस अवसर पर राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के लिए राज्य नोडल अधिकारी के साथ- साथ डब्ल्यूएचओ इंडिया और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, मानव संसाधन और विकास मंत्रालय, युवा मामले और खेल मंत्रालय, और राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम, के प्रतिनिधि मौजूद थे। बैठक की अध्यक्षता स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की संयुक्त सचिव (आरसीएच) श्रीमती वंदना गुरानी, (आईएएस) ने की। इस अवसर पर परिवार नियोजन, बाल स्वास्थ्य और किशोर स्वास्थ्य के उपायुक्त डॉ. एस. के. सिकदर और बाल स्वास्थ्य की उपायुक्त डॉ. शिला देब भी उपस्थित थीं।

इस अवसर पर श्रीमती गुरानी ने यहां उपस्थित गणमान्य लोगों को संबोधित किया। उन्होंने राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस को दुनिया में सबसे बड़ा निर्धारित आंगनवाड़ी और स्कूल आधारित कृमि मुक्ति कार्यक्रम बनाने के लिए, इसमें भाग लेने वाले राज्यों को फरवरी 2018 के चरण में देश भर में 26.6 करोड़ बच्चों तक सफलतापूर्वक पहुंचने के लिए बधाई दी।

श्रीमती गुरानी ने कहा, ‘‘राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस वर्ष 2015 में अपनी स्थापना के बाद से ही काफी कारगर रहा है और इसने काफी लोकप्रियता हासिल की है। ऐसा केवल राज्य और जिला स्तर के सभी हितधारकों के समर्पित प्रयासों से ही संभव हो पाया है। अब हमारा उन बच्चों तक पहुंचने पर ध्यान केंद्रित करना महत्वपूर्ण है जो स्कूल या आंगनवाड़ी नहीं जाते हैं। स्कूल नहीं जाने वाली यह आबादी हमारे देश की सबसे हाशिए वाली और कमजोर आबादी है। हम जब हर राज्य के हर बच्चे को लगातार कृमि से मुक्त रखने में सक्षम होंगे, तभी हम वास्तव में इस कार्यक्रम को सफल मान सकते हैं। मैं चाहती हूं कि इस कार्यक्रम को सभी बच्चों तक पहुंचाने के लिए सभी राज्य नई रणनीतियों की तलाश करें और नई तकनीक का उपयोग करें। इसके अलावा, सभी राज्यों को कवरेज बढ़ाने के लिए ग्राम स्वराज अभियान के विस्तारित अधिकार के तहत, नीति आयोग के द्वारा पहचान किये गये महत्वाकांक्षी जिलों के लिए उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाना चाहिए।’’

संयुक्त सचिव के विचारों की सराहना करते हुए, डॉ. एस. के. सिकदर ने कहा कि ‘‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के तहत कृमि मुक्ति उपचार के साथ 1-19 वर्ष के 90 प्रतिशत बच्चों के पास पहुंचने के लिए प्रतिबद्ध है। सभी राज्यों को इस कार्यक्रम के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम के लिए योजना बनाने की जरूरत है।’’

इस समूह ने दवाओं की आपूर्ति और आपूर्ति श्रृंखला के मुद्दों; प्रशिक्षण; समुदायों को शामिल करना; और कार्यक्रम का अधिकतम कवरेज प्राप्त करने के लिए निजी स्कूलों और स्कूल नहीं जाने वाले बच्चों को शामिल करना सहित प्रमुख कार्यक्रम घटकों पर चर्चाओं पर ध्यान केंद्रित किया।

राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस 1-19 वर्ष की आयु के बच्चों में आंत की कृमि के सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम से निपटने के लिए भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय का प्रमुख कार्यक्रम है। यह कार्यक्रम देश भर के सभी स्कूलों और आंगनवाड़ी में एक निश्चित दिन 10 फरवरी को आयोजित किया जाता है, और कृमि संक्रमण की व्यापकता के अनुसार चुनिंदा राज्यों में 10 अगस्त को छमाही आधार पर आयोजित किया जाता है।

प्रीस्कूल और स्कूल-आधारित कृमि मृक्ति कार्यक्रमों को विश्व स्तर पर “विकास का सर्वश्रेष्ठ उपाय’’ के रूप में मान्यता हासिल है। कृमि संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षित और फायदेमंद अल्बेन्डाज़ोल टैबलेट से कृमि मुक्त करना एक प्रभावी समाधान है। भारत में दुनिया में कृमि संक्रमण का प्रसार सबसे अधिक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुमान के अनुसार 2014 में भारत में 1-14 साल के 22 करोड़ से अधिक बच्चों में कृमि संक्रमण का खतरा है। आंतों में कीड़े के संक्रमण के कारण बच्चों की वृद्धि और विकास पर प्रभाव पड़ सकता है, और स्कूल में उनके प्रदर्शन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, और बाद में उनके जीवन की आजीविका क्षमता पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।