- कलयुग के अंत का सच : संजय जोठे
| 21 May 2018

“ आखिर कलयुग है क्या और इस शब्द का इस्तेमाल कब और क्यों हुआ , दरसल कलयुग शब्द का इस्तेमाल सबसे पहले राम चरित मानस के रचियता तुलसी दास दुबे ने किया जिसको अकबर ने विशेष निमंत्रण दे काशी से बुलवाया था , तुलसी दास ने रामायण और हनुमान चालीसा लिखी लेकिन इनको सबसे बड़ा दुःख यह था की ठीक अकबर के काल में ही कुछ ऐसे तथाकथित शुद्र विद्वान भी हो गए थे जो ब्राह्मणों के ज्ञान को चुनोती देने लगे थे इनके पाखंड को उजागर करने लगे थे , इसलिए तुलसी दस ने इस बात को भांपते हुए यह कहा की अब कलयुग आ गया है यानि शुद्र पढने लगे है ज्ञान के क्षेत्र में आ गए है जबतक केवल ब्राह्मण का ज्ञान/ शिक्षा पर कब्जा था तब सतयुग था , जब क्षत्रिय शिक्षा में आ गए तो दवापर युग आ गया जब वैश्य भी ज्ञान में आ गया तो त्रेता यानी तीन वर्ण युग आ गया और जब शुध्र ने कदम रखा तो कलयुग आ गया यानी विनाश का वक्त आ गया अधर्म का वक्त आ गया और इसका अंत करने के लिए ब्राह्मण आज भी प्रयत्नशील है , दिया गया लेख श्री संजय झोटे द्वारा लिखा गया है जरूर पढ़िए “” सम्पादकीय

अंग्रेजों के भारत आने तक यह पता नहीं था कि गौतम बुद्ध कब और कहाँ जन्मे थे, अधिकतर यूरोपीय यूनिवर्सिटी ये मानती थी कि बुध्द अफ्रीकन हैं, कई किताबों में ये दावे हैं कि बुध्द इथियोपिया से थे।

अंग्रेजो के आने तक ये भी पता नहीं था कि अशोक नाम के कोई महाप्रतापी राजा हुए हैं, और उनका शासन प्रशासन और धर्म कितना महान था।
अंग्रेजो के आने के बाद ही सिन्धु घाटी की बौद्ध सभ्यता का पता चला था, तब तक न हरप्पा न धोलावीरा और न ही धम्म्लिपि (तथाकथित ब्राह्मी लिपि) का अर्थ समझ में आया था.
इसका क्या कारण है?
इसका कारण आपके सामने है. अभी TV ऑन कीजिये और आपको उस कुटिल और धूर्त ब्राह्मणवाद का नँगा नाच सामने नजर आएगा। इसी ब्राह्मणवाद ने इतिहास को नष्ट करके भारत का भारी नुकसान कियाहै। इसी वजह से भारत कमजोर, कायर और गुलाम हुआ। जो देश या समाज अपना इतिहास भूल जाता है उसपर दूसरे देश या समाज राज करते हैं।

आज भी वही दरिंदगी और ब्राह्मणी खेल जारी है। पुराने पुराण हों या आज के न्यूज चेनल्स हों वे दलितों और शूद्रों के बारे में कुछ भी रिकोर्ड नहीं करते.

लाखों किसान, जिनमे 95% से अधिक ओबीसी दलित आदिवासी ही होते हैं - उनमे से चार लाख से अधिक ने आत्महत्या की हैं, न्यूज चैनल उनकी बात नहीं करते।

करोड़ो दलीतों, ओबीसी और आदिवासी युवा बेरोजगार और अशिक्षित भटक रहे हैं, जलालत और अपमान झेल रहे है लेकिन ये न्यूज चैनल और अखबार उनकी बात नही करते।

करोड़ो बहुजन महिलाओं का हर साल बलात्कार होता है, लेकिन ये ब्राह्मणवादी मीडिया उसकी बात नहीं करता है।
गौर से दखिये न्यूज चैनल्स आज के हिन्दू ब्राह्मणवादी पुराण हैं, कलियुग का अंत, विश्व का विनाश, कोरिया का अणुबम, चीन की बुलेट ट्रेन, जापान का भूकंप, अश्वत्थामा की चड्डी का नाड़ा, पांडवों के पैर के निशान, पाताल लोक की नागकन्या, स्वर्गलोक की अप्सरा का श्राप इत्यादि सब इनके न्यूज चेनल्स में नजर आता है.
लेकिन गोरखपुर, सराहनपुर, जंतर मन्तर, भगाणा, ऊना, कैराना ये सब एकदम गायब हो जाता है. शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, ज्ञान विज्ञान की बदहाली जैसे मुद्दे नजर ही नही आते हैं।

पुराने जमाने मे भी यही होता था। लोग अमानवीय शोषण, गरीबी और जातिवाद में फंसे हुए रोते बिलखते रहते थे लेकिन इस मुल्क के नरपिशाच उनकी तरफ देखते भी नही थे।
गरीब लोगो की मदद तो छोड़िए, ये पाखण्डी उन्हें कर्मकांडों और मन्त्र तंत्र में फसाकर मृत्युभोज, दान पुण्य, श्राध्द, कालसर्प, पितृशान्ति इत्यादि फालतू की बकवासों में फसाकर उन गरीबो को डराते थे। उन गरीबो की खून पसीने की कमाई भी कर्मकांडों और दान के नाम पर छीनकर खुद भकोस जाते थे।

आज के टीवी चैनल और अखबार भी यही कर रहे हैं। वे आपसे दूसरे ढंग का दान, श्राद्ध और मृत्युभोज करवाते हैं। आजकल आपको नई कार, मोबाइल, मकान, कपड़े इत्यादि खरीदने के लिए उकसाया जाता है और आपके समाज के जरूरी मुद्दों पर चर्चा न करके परियों, अप्सराओं, पाण्डवो, महाभारत रामायण की कहानियों की बकवास फैलाई जाती है।
भारत का इतिहास और इतिहास बोध सहित विज्ञान और भारत की सभ्यता और संस्कृति को किसने क्यों और कैसे नष्ट किया है आप आँख खोलकर अभी देख सकते हैं.
अब सोचिये इस मुल्क के सनातन दुश्मन और देशद्रोही कौन हैं?
अब सोचिये इस देश के दुश्मन और लुटेरे बहुजन हैं या गैर बहुजन हैं??