२ अप्रैल से बज गया गृह युद्ध का बिगुल , डर आर खोफ से दबाने की कोशिश की दलित आन्दोलन को , हुए नाकाम
| 07 Apr 2018

जन उदय : अभी हाल में २ अप्रैल को दलित संघटनो द्वारा एस सी / एस टी एक्ट में बदलाव को लेकर पुरे देश में भारत बंद किया गया , लेकिन वर्तमान सरकार जो दलित विरोधी है , इस आन्दोलन को बदनाम करने के लिए पुरे देश में भगवा आतंकियो ने दलित आन्दोलन के नाम पर तोड़ फोड़ की गोलिया चलाई और आगजनी की ताकि इस आन्दोलन को बदनाम किया जा सके . लेकिन बाद में ये सब यही खत्म नहीं हुआ है इसके बाद सरकार अपने तन्त्र का इस्तेमाल करते हुए दलितों पर आक्रमणकारी निति अपनाई हुई है यानी उन दलितों और युवाओं को जबरदस्ती जेल में डाला जा रहा है जगह जगह उन पर फर्जी केस दर्ज किये जा रहे है ताकि इन लोगो में डर बैठ सके मध्य प्रदेश को मिला कर जहा जहा भाजपा सरकार है वहा वहा पर दलितों के खिलाफ सरकार की दमनकारी निति चल रही है .

इन घटनाओं के जगह जगह से विडियो आ रहे है जहा पर पुलिस थाणे में दलित युवाओं को ले जा कर बेरहमी से पीट रही है , खुद पुलिस गाडिओ में आग लगा रही है और भाजपा के गुंडे तोड़ फोड़ और आगजनी कर रहे है .
इतनी बड़ी घटनाओं को बिना किसी योजना बनाए अंजाम नहीं दिया जा सकता यानी इसमें सरकार शामिल है इसमें कोई शक नहीं

मध्य प्रदेश में तो यहाँ तक स्थिति है की सरकार ने १४ अप्रैल तक हाई अलर्ट उर धारा १४४ लगा दी है वह भी १४ अप्रैल तक यानी दलित युवा और दलित वर्ग १४ अप्रैल को बाबा साहेब की जयंती न मना सके
यही हालात खुद भाजपा सरकार ने अपने सभी विदेशी दूतावास में पैदा कर दिए है जहा पर यह कहा गया है की दूतावास या उसमे काम करने वाले बाबा साहेब की जयंती न मनाये

दुनिया के ऐसे बहुत कम ही देश बचे होंगे जो किसी न किसी तरह के हिंसक आन्दोलन या आतंकवाद से न जूझ रहे हो , पूरा एशिया , यूरोप , अमरीका सभी देश इस बिमारी से ग्रस्त है , ये आतंकवाद कैसे पनपा कैसे आया सबसे पहले हम आतंकवाद की कुछ प्रक्रति से मिल लेते है

पूरी दुनिया में हम जिस आतंकवाद को जानते है वह है हिंसक आतंकवाद यानी इसमें या इसके मानने वाले सिर्फ हिंसा में विशवास रखते है यानी अल कायदा , आर एस एस , आइसिस ,लिट्टे जैसे संघठन इसमें आते है , दूसरा होता है सांस्कृतिक आतंकवाद जो दुनिया में सिर्फ आर एस एस चलाता है इसके पूरी दुनिया में बहुत सारे सन्घठन है जो लोगो को गुमराह करके अपनी संस्क्रती की और खींचते है और उन्हें अपने समाज और संस्क्रती की सच्चाई से दूर रखते है , आर एस एस के सन्घठन , अमरीका , यूरोप , कनाडा ,एशिया सभी देश में ये लोग काम करते है इसके कुछ मुख्या एजेंट है ब्रहम कुमारी , पतंजलि , आर्ट ऑफ़ लिविंग , विश्व हिन्दू परिषद , बजरंग दल आदि

तीसरा है राजननीतिक आतंकवाद इसमें अमरीका रूस , चीन , कोरिया इसराइल आदि मुख्य देश है जो पूरी दुनिया में अपना वर्चस्व कायम करने के लिए इन देशे में तरह तरह के आन्दोलन चलवाते है , इन देशो की अर्थ वाव्य्स्था पर कब्जा जमाते है और इन् देशो को वैसा ही चलाने की कोशिस करते है जैसा ये चाहते है

सभी तरह के आतंकवाद का अध्यन अगर हम करे तो हम ये ही पायंगे की राजनितिक आर्थिक , और हिंसक आतंकवाद उस वक्त खत्म हो जाते है जब इनका मकसद खत्म हो जाता है लेकिन एक आतंकवाद ऐसा आतंकवाद है जो इतनी अस्सानी से खत्म नहीं होता बल्कि इसकी विरासत सदीओ तक चलती रहती है और वो है ब्राह्मण आतंकवाद

बड़े ही साधारण लोग ये कहेंगे की ये ब्राह्मण यानी हिन्दू दरअसल ये बिलकुल गलत है क्योकि भारत में हिन्दू शब्द मुस्लिम काल से पहले था ही नहीं , और भारतीय समाज में ब्राह्मण इसलिए उपर रहा क्योकि ये विदेशी थे और इनको यहाँ यहाँ के लोगो से काफी सम्मान मिला और लोगो ने अपने दिलो में काफी आगाह भी दी लेकिन इनकी गद्दार प्रवर्तियो के कारण ये अलग ही रहे मोर्य काल में अशोक के पोते को उसके सेनापति जिसका नाम पुष्य मित्र शुंग था उसने धोखे से मार दिया इसके बाद इसने सभी बौध लोगो की त्या करना शुरू कर दी जो इन बचे उनको इन ब्राह्मणों ने गुलाम बना लिया

ब्राह्मण आतंकवाद क्यों दुनिया का सबसे खतरनाक आतंकवाद कहा जता है इसका पता इसी से चलता है की इन्होने जिन बौध लोगो को गुलाम बनाया उनको सम्पति , शिक्षा सभी छीन ली और इस गुलामी को पीडी दर पीडी बनाए रखा , और एक सामाजिक , सांस्कृतिक वाव्य्स्था कायम कर ली जिसमे अपने आपको भगवान् का दूत बना दिया , अपने आपको सबसे श्रेष्ठ बना लिया और बौध लोगो को सबसे नीचे स्तर पर लाकर सेवक यानी गुलाम बना लिया और साथ में यह भी कह दिया की यह भगवान् का आदेश है . ये लोग समाज के सबसे निचले स्तर पर ही नहीं पहुचे बल्कि आर्थिक सामाजिक शेक्षिक रूप से भी बहिष्कृत हो गए ये पढ़ नहीं सकते थे , समाज में रह नहीं सकते थे , इन लोगो को शुद्र कहने लगे और इनका मानसिक विकास बिलकुल रुक गया ये कोरे जानवर की तरह जीवन बिताने लगे ,

हजारो साल बाद इतिहास ने करवट बदली और ब्रिटिश शासन के दौरान बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर ने पूरी दुनिया को ये साबित कर दिया की ब्राह्मण इस देश में विदेशी है . राजनैतिक पहुलुओ को नजर में रखते हुए बाबा साहेब ने आरक्षण के बदले कम्युनल अवार्ड को छोड़ा .

लेकिन ब्राह्मणों ने तथाकथित शुद्रो को पढने से रोकने के लिए , उन पर अत्याचार करने में कोई कमी नहीं छोड़ी है आज भी ये उनको मानसिक रूप से गुलाम बना कर रखना चाहते है देश में इन शुद्रो के प्रति अत्याचार अभी भी कम नहीं हुआ है

इसलिए हम कह सकते है की गोली से तो आदमी एक बार मर जाता है लेकिन ब्राह्मणों ने जो सांस्कृतिक गुलामी है वह इतनी आसानी से नहीं जानी वाली इसलिए दुनिया का सबसे खतरनाक आतकंवाद ब्राह्मण आतंकवाद है
लेकिन आज दलित युवा जाग चुका है और अब इस तरह की गुलामी के लिए बिलकुल तैयार नहीं अगर ब्राह्मणवादी लोग नहीं माने तो यह हो सकता है की देश में गृह युद्ध जैसे हालात हो या हो ही जाए इसका फैसला देश के सभी निवासिओ को करना है