जानिये धरती से फरसाराम का 21 बार क्षत्रिय बिहीन करने का सच : मों मिनाज़
| 05 Feb 2018

क्षत्रिय का मतलब होता है सर पे क्षत्र(मुकुट) धारण करने बाला इसलिये जो भी जिस भी जाति के राजा हुये उन्है क्षत्रिय ही कहा जाता है।सिर्फ राजपूतों को क्षत्रिय कहना बिलकुल झूठ है।पहले चमार कुम्हार पासी अहीर तेली काछी भंगी कुर्मी जाट आदि जातियों के भी लोग राजा रहै है।इसलिये आज भी संघ इन्है क्षत्रिय कहता है क्योंकि वो जानता है क्षत्रिय का मतलब और इतिहास भी पता है उन्है क्योंकि लिखने बाले वही थे।
इसलिये 21 बार धरती से राजपूत ही नहीं सभी जातियों के क्षत्रियों को समाप्त करने का अर्थ छिपा है

मेरी खोज में तीन बातें सामने आई है।
पहली बात ब्रह्मणो ने क्षत्रियों को हमेसा शस्त्र चलाने की सीख दी,,उन्हौने कभी भी शास्त्र पढने य शिक्षा हासिल करने की सलाह नहीं दी,,इससे हुआ ये कि हर राजा को ब्रह्मण राज पुरोहित रखना अनिवार्य हो गया,क्योकिं लिखने का काम ब्रह्मण ही करता था क्योंकि वो पढा लिखा होता था,,इससे हुआ ये कि जब कोई राजा ब्रह्मण राजपुरोहित के आदर सम्मान में भूले से भी चूक कर दे य राजपुरोहित की गलती पर उसे ढांट दे य सजा दै दे तो राजपुरोहित अपने अपमान का बदला लेने के लिये दूसरे राजा को संदेशा भेजकर अपने राजा पर चडाई करने का निमंत्रण दै देते थे और उस निमंत्रण में अपने राज्य के सारे खुपिया राज बता देते थे इससे चडाई करने बाले राजा को बहुत ज्यादा आसानी हो जाती थी युद्ध जीतने में,क्योंकि उसे राज्य की सारी कमजौरी पता चल जाती थी,,
इसलिये राजपुरोहित राजा से मंदिरो के गर्भग्रहो में खजाना छिपबाके रखबाते थे कि अगर किसी राजा ने राज्य पर चडाई कर दी और अपने राज्य का खजाना लूट लिया तो भी मंदिर का खजाना राजपुरोहित को आसानी से बच सके,,

दूसरी बात,काशी में गंगा घाट पर हुये शास्त्रार्थ से रैदास का प्रभाव ब्रह्मणो से ज्यादा बड गया,अनेको राजाओं ने ब्रह्मणो की जगह रैदास को अपना राजगुरू बनाना चालू कर दिया,, ब्रह्मणो को ये बात बिल्कुल हजम नहीं हो रही थी कि रैदास चमार होकर राजगुरू कैसे बन सकता है,,इसी बात का बदला लेने के लिये ब्रह्मणो ने दूसरे राजाओं को अपने राजा के सारे भेद और कमजौरियों को बताना चालू कर दिया। और ऐक दूसरे राजाओं को आपस में भडकाने का काम चालू कर दिया,कई राजाओं की बडा चडा के तारीफें करके उन्है विशव विजय के सपने दिखाके के लडाई में मरबा दिया,,जिससे ब्रह्मणो का बदला पूरा होता गया

तीसरी बात अंग्रेजो के आने से पहले आम इंसान और राजा पढा लिखा तो था नहीं इसलिये ब्रह्मणो ने राजाओं और आम इंसान को डराने के लिये झूठी अफबाहै फैलांई कि जो भी ब्रह्मण का अपमान करेगा उसे नर्क मिलेगा पाप लगेगा,कोडी हौकर मरेगा आदि,, इसी बजह से कोई भी राजा ब्रह्मण को कभी मार नहीं पाया और आज राजाओं के राज खत्म हो गये लेकिन ब्रह्मण का औहदा बैसा का बैसा है।
ब्रह्मण ने कभी भी न राजा न आम इंसान को पढने के लिये कभी भी प्रेरित नहीं किया क्योंकि अगर सभी लोग पहले ही पढ जाते तो इनका भांडा तभी फूट जाता और आज हम विशव के टॉप पर होते,, ब्रह्मणो ने ऐक भी स्कूल ऐसा नहीं खोला जिसमे आम इंसान पढ सके,,नियम ये कहता है जो पढना जानता है वही पाठशाला खोलता है लेकिन इन्हौने ऐसा नहीं किया,, इसलिये जो इनके मन में आया बैसा ये खुद के बारे में बडा चडा के लिखते गये और हर जगह खुद को सबसे ऊपर रखते गये,, इसलिये आज कुछ भी पढ लीजिये हर चीज में ब्रह्मण को ही सर्वोपरि बताया गया है।

21 बार क्षत्रियों को अकेले फरसाराम ने धरती बिहीन नहीं उनके वंशजों ने मिलकर 21 राजाओं के क्षत्र उतरबाये,यानी 21 राजाओं को मरबाया इसी को इन लोगो ने 21 बार धरती से क्षत्रिय बिहीन की बात बनाके के प्राचारित किया।क्योंकि लोगो की मानसिकता है वो जब तक किसी इंसान की चमत्कारी शक्तियों के बारे में नहीं जानेंगे तब तक उसे सच नहीं मानेंगे,, इसलिये कहा गया है जंहा चमत्कार वंहा नमस्कार,
यही कारण है इस कहानी को लोगो के मन में बिठाने के लिये फरसाराम को सुपर हीरो बनाया गया

नोट-ये मेरा आंकलन है आप अपनी तरफ से अपनी राय जरूर दें

ये चरित्र है ब्रह्मण का जो वेद पुराणों में औरत को देवी बताता है,वही औरत से पैर धुलाता है।

इसलिये जंहा सोच वंहा खोज